लाखों की रिश्वत देकर नौकरी पाने वाले संविदाकर्मियों पर कब गिरेगी गाज? क्य़ा लाइनमैन ही बन बैठे हैं चोरी के मास्टरमाइंड!

लाखों की रिश्वत देकर नौकरी पाने वाले संविदाकर्मियों पर कब गिरेगी गाज? क्य़ा लाइनमैन ही बन बैठे हैं चोरी के मास्टरमाइंड!

  • जनप्रतिनिधियों और जनता का भारी विरोध दरकिनार कर मोटे केबल और स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी विभाग बिजली चोरी रोकने मे पूरी तरह विफल क्यों हैं इस पर विचर क्यूं नही ? 
  • ​70% बिजली चोरी का असली गुनहगार कौन? पसीने में लथपथ आम जनता या विभाग की छत्रछाया में पल रहे धन्नासेठ और कारखाना मालिक ?
  • देवबंद में 70% बिजली चोरी का सच जनता का उत्पीड़न या भ्रष्टाचार की काली कमाई छुपाने का घिनौना पैंतरा? जर्जर पोल, फुंकते ट्रांसफार्मर और नया केबल डालने के नाम पर वसूली जेई साहब के कारनामों पर पर्दा डालने उतरी 'चिंटू' मीडिया!


देवबंद। भीषण गर्मी में जब देवबंद की जनता बूंद-बूंद पानी और बिजली की एक-एक किल्लत से त्रस्त है, तब विद्युत विभाग अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए एक नया शगुफा लेकर आया है 70% बिजली चोरी! सवाल यह उठता है कि यह 70% बिजली चोरी सच में हो रही है या फिर जनता के घरों में जबरन घुसने, एफआईआर (FIR) का खौफ दिखाने और पूर्व की तरह अवैध वसूली का नया रास्ता साफ करने के लिए एक सोची-समझी साज़िश रची जा रही है? बीते सालों में देवबंद के चप्पे-चप्पे में जनता और जनप्रतिनिधियों के भारी विरोध के बावजूद जबरन 'स्मार्ट मीटर' थोपे गए। विभाग ने दावा किया था कि पुराने तारों को हटाकर 'मोटा केबल डाला जा रहा है जिससे बिजली चोरी और फॉल्ट का नामोनिशान मिट जाएगा।

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आज विभाग से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि जब पूरा सिस्टम आधुनिक हो चुका है, केबल मोटे हो चुके हैं, और मीटर स्मार्ट हो चुके हैं, तो फिर यह 70% की महा-चोरी कैसे और किसकी शह पर मुमकिन हो रही है? यदि विभाग खुद यह स्वीकार कर रहा है कि 70% बिजली चोरी हो रही है, तो उसे यह भी सार्वजनिक करना होगा कि यह चोरी कर कौन रहा है? क्या रात-दिन पसीने में लथपथ रहने वाली आम जनता, या फिर विभाग की छत्रछाया में फल-फूल रहे बड़े-बड़े उद्योगपति और धन्नासेठ? विभागीय सूत्र बताते हैं कि बिजली चोरी होती नहीं, बल्कि बाकायदा कराई जा रही है विभाग के भीतर चल रहा संविदा और ठेकेदारी का खेल ही इस पूरे भ्रष्टाचार की असली जड़ है।

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विभागीय सूत्रों की मानें तो देवबंद में खुद को बिजलीघर का 'मालिक' समझने वाले कई ठेका और संविदा कर्मचारी (लाइनमैन व अन्य) मोटी-मोटी रकमें देकर और सांठगांठ करके नौकरियां हासिल करते हैं। अब सवाल जो संविदाकर्मी लाखों की रिश्वत देकर नोकरी हासिल करेगा वह अपनी उस रकम की भरपाई कहाँ से करेगा? जाहिर है, यही लाइनमैन और संविदाकर्मी साठगांठ करके बड़े पैमाने पर बिजली चोरी करवाते हैं, लाइनों में बाईपास लगवाते हैं, और विभाग को हर महीने करोड़ों रुपये का चूना लगाते हैं। क्या उच्च अधिकारी अपने दफ्तरों में बैठकर इस केंसर से अनजान हैं? ऐसा होना नामुमकिन है। सच तो यह है कि कद्दू कटेगा तो सबमें बंटेगा की तर्ज पर इस काली कमाई का हिस्सा ऊपर तक जाता होगा इसीलिए आज तक इन भ्रष्ट संविदाकर्मियों के खिलाफ कोई बड़ी जांच नहीं बैठाई गई।

आज देवबंद में व्यवस्था पूरी तरह पंगु साबित हो रही है। केबल जल रहे हैं, ट्रांसफार्मर फूंक रहे हैं, और खंभे जर्जर अवस्था में खड़े मौत को दावत दे रहे हैं। कई कॉलोनियों में नया केबल डालने के नाम पर जनता से सरेआम पैसों की मांग करने वाले 'जेई साहब' पर बात न हो, इसीलिए मीडिया में '70% बिजली चोरी' की खबरों का प्रोपेगैंडा परोसा जा रहा है। मकसद साफ है जनता को खौफ के माहौल में जीने पर मजबूर कर दो ताकि कोई अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाने की हिम्मत न कर सके।

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देवबंद की जनता पहले ही स्मार्ट मीटरों की मनमानी बिलिंग से पीड़ित है। जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पहले 1,000 से 1,500 रुपये का मासिक बिल भरते थे, आज उनके घरों में 4,000 से 5,000 रुपये का बिल आना सामान्य बात हो चुकी है। इस खुली लूट और ओवर-बिलिंग की जांच करने के बजाय विभाग उल्टा जनता को ही चोर साबित करने पर तुला हुआ है ताकि खुद जो मलाई चाटी जा रही है उस पर किसी का ध्यान नही जाए और ये करप्ट और भ्रष्टाचारी सारा दोष देवबंद की देव तुल्य जनता के सर मढ कर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ दें इस पूरे घटनाक्रम में सबसे शर्मनाक भूमिका स्थानीय मीडिया के कुछ कथित पत्रकारों की रही है। जिस मीडिया को पीड़ित उपभोक्ताओं और जनता की बुलंद आवाज बनना चाहिए था, वह आज एसी कमरों में बैठकर विभागीय अधिकारियों के पीआर (PR) एजेंट की तरह काम कर रहा है। ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं जिससे भ्रष्ट लाइनमैनों और संविदाकर्मियों को जनता के घरों में जबरन घुसने और डराने का लाइसेंस मिल सके। विभाग के इस खुले भ्रष्टाचार और उगाही तंत्र पर लिखने के लिए इन 'कलम के सिपाहियों' की स्याही सूख जाती है। शायद इन्हें भी अपना कनेक्शन काटे जाने का डर सताता होगा, या फिर इनका भी हिस्सा तय है! तभी तो ये खुद को चौथा स्तंभ कहने वाले कथित पत्रकार जनता के बजाय विभाग की गोद में बैठे नजर आते हैं।

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जन-आवाज़ के सीधे सवाल क्या विभाग देगा जवाब?

 1. जब स्मार्ट मीटर और मोटे केबल लग चुके हैं, तो 70% चोरी का दावा तकनीकी रूप से कैसे संभव है? क्या यह आपकी नाकामी नहीं है ?

 2. क्या विभाग मे मोटी रकम देकर नौकरी पाने वाले और बिजली चोरी कराने वाले भ्रष्ट संविदाकर्मियों और लाइनमैनों की चल अंचल संपत्ति की जांच कराएगा विभाग?

 3. अवैध वसूली और कॉलोनियों में केबल डालने के नाम पर पैसे मांगने वाले अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी?

 4. स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल 4 गुना कैसे बढ़ गए, इसकी उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं की जा रही?

देवबंद की जागरूक जनता अब इस दमन और डराने की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी। विभाग को अपनी अकर्मण्यता, जर्जर व्यवस्था और आंतरिक भ्रष्टाचार का जवाब देवबंद के नागरिकों आला अधिकारियों और परदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को देना होगा। 

रिपोर्ट - दीन रज़ा





Deen Raza

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