मस्जिद महल या मदनी मस्जिद के असली वारिस तो कासिम और उनके वारिस होने चाहिएं..?
- मस्जिद महल विवाद मे सोशल मीडिया पर महल मस्जिद के नगर पालिका देवबंद मे लिखे मस्जिद के नाम वाले पुराने पेपर डाल कर किया गिरफ्तारी से बच पाएंगे साईम सिद्दिकी
- मदनी मस्जिद पक्ष के कथित मदनी सहाब या कमेटी के लोग कब करेंगे मदनी मस्जिद के सही डॉक्युमेंट सोशल मीडिया पर वायरल ये देखा बाक़ी है
देवबंद-- 09/10/2023 को दर्ज होने वाले मामले मे अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है जनता गुल्लक के सारे ठग मिलकर ठग ऑफ देवबंद के सरदार को बचाने मे लगे हुए हैं।
आरोपी साईम सिद्दिकी ने अपनी सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ जानकारी पोस्ट की है नगर पालिका देवबंद मस्जिद महल के नाम को लेकर कुछ डॉक्युमेंट शेर किए गए हैं काग़ज़ों मे मस्जिद का नाम मस्जिद महल लिखा है बस यही वो बताना चाहते हैं उन काग़ज़ों से मस्जिद का नाम तो पता चलता है मग़र वारिसों का नहीं..?
नगर पलिका देवबंद मे किसी भी धार्मिक स्थान की भूमि पर लिखा धार्मिक स्थल का नाम इस बात को प्रमाणित नहीं कर सकता है कि सम्पति का अस्ल वारिस कोन है ठग ऑफ देवबंद जब पूरे नगर देवबंद को चुना लगा सकता है तो प्रशासनिक अधिकारियों को हर प्रकार से भरम मे डालने का अछा ख़ासा अनुभव आरोपी को मालूम पड़ता है।
मस्जिद महल पक्ष की ओर से तो सोशल मीडिया नगर पालिका देवबंद के कागजात अपलोड हो चुके हैं अब देखना ये है कि मदनी मस्जिद के पक्ष के डॉक्युमेंट कब अपलोड किए जाएंगे और किया उनमे भी सिर्फ मस्जिद का नाम ही लिखा होगा या असली वारिसों की जानकारी भी मदनी मस्जिद पक्ष सामने लाएगा ये आगे देखा जाएगा।
मदनी मस्जिद पक्ष के कथित मदनी सहाब और कमिटी के अन्य लोग सामने आकर स्तिथि को साफ क्यूं नहीं करना चाहते ये समझ से परे है क्षेत्र मे चर्चा है कि कथित मदनी सहाब भी सेंकड़ों बीघा धरती के मालिक बन चुके हैं मगर फ़िर भी मदनी मस्जिद के असली वारिसों को उनका हक़ दिलाने के लिए कथित मदनी सहाब भी कोई बात सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। शेष क्रमशः
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