मदनी मस्जिद या मस्जिद महल के असली वारिस कोन हैं.. पड़ताल ( किस्त - 05)

07 धाराओं मे मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं

  1. ठग ऑफ देवबंद की पूरी गैंग चंदे का धंधा करने को ही अपना मुख्य रोज़गार समझती है क्या..?
  2. मस्जिद महल या मदनी मस्जिद विवाद मे पूर्व मे प्रकाशित हुई मीडिया ख़बरों की ख़ास पड़ताल

देवबंद-- कल की ख़बर मे हमने आपको बताया था कि महमूदुर्रहमान पुत्र अतीकुर्रहमान निवासी मोहल्ला खानकाह की शिकायत पर ठग ऑफ देवबंद के सरदार पर 09 अक्टूबर 2023 को मुकदमा दर्ज हो गया था।

कल हमने सवाल किया था कि मुकादम लिखने के बाद गिरफ़्तारी करने के लिए किया एक्शन लिया गया है सवाल ये भी था किया गिरफ्तारी हो भी पाएगी या नहीं मुकदमा लिखे जाने के 08 दिनों के बाद भी अभियुक्त पर कोई दबिश पुलिस ने नहीं डाली है जनता गुल्लक का चंदा शायद यहां भी काम आ रहा होगा।

मदनी मस्जिद या मस्जिद महल के असली वारिसों की कोई भी बात अभी करना मुनासिब नहीं है अभी आपको बताते हैं कि 09 अक्टूबर को देवबंद थाने पर FIR संख्या 0557 दिनांक 09/10/2023 को दर्ज महमूदुर्रहमान की शिकायत पर दर्ज होने के बाद आरोपी कहां है और किया कर रहा है ये आज आपको बतायेंगे।

मग़र उस से पहले पूर्व मे मस्जिद विवाद मे प्रकाशित हुई ख़बरों की पड़ताल करेंगे सबसे पहले खबर पर आते हैं ख़बर बीते 8 जून की है जिसमें लिखा है कि माजिद महल प्रकरण मे रिपोर्ट दर्ज पुलिस ने की जांच शुरू।

इसी ख़बर मे आगे लिखा है कि साईम सिद्दिकी की तहरीर पर अज्ञात मे मामला दर्ज कर जांच की जा रही है ख़बर मे सूचनाओं को पारदर्शिता के साथ नहीं लिखा गया है कमाल ये है कि महल मस्जिद पक्ष ने अज्ञात की शिकायत की थी मदनी मस्जिद पक्ष की नहीं जहां तक बात ख़बर छापने की है तो कोई भी प्रेस नोट लिख कर किसी भी मीडिया संस्थान से प्रकाशित करा सकता है।

एक और ख़बर जो मे पूर्व मे प्रकाशित हुई थी उस समय देवबंद के SDM भी संजीव कुमार हुआ करते थे ख़बर मे मदनी मस्जिद और मस्जिद महल के विवाद को तूल पकने की बात पर ज़ोर दिया गया है साथ ही दीवार पर लिखे नाम को खुर्द बुर्द करने पर ज़ोर दिया गया है अब ये फ़ैसला आपको करना है कि खुर्द बुर्द मस्जिद का नाम हो सकता है या मस्जिद की करोडों की संपत्ति।

उस समय के एसडीएम देवबंद संजीव कुमार ने अपनी जांच मे किया पाया था वो उन्हीं को मालूम होगा लेकिन ख़बर मे आगे माहौल खराब करने एवं शांति व्यवस्था की आड़ लेकर मस्जिद को विवाद का केन्द्र बना दिया गया लेकिन दोनों ही पक्ष असली बात जनता को नहीं बता पाए वो है मस्जिद की संपत्ति और मासिक इन्कम सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र मस्जिद की चंदा पेटी जिसमें आप लोग भी मस्जिद के सहयोग के लिए दान पुण्य कमाने के लिए चंदा दे देते हैं।

ठग ऑफ देवबंद के सरदार की गिरफ्तारी क्यूं नहीं हो पाई है इसका ज़वाब हम आपको पहले ही दे चुके हैं बता चुके हैं कि देवबंद पुलिस प्रशासन को गुमराह करने मे सबसे अधिक उन्ही छुटभैये नेताओं और समाजसेवियों का हाथ है जिन्होंने ईदगाह रोड़, दारूल उलूम चौक, तहसील चौक, बडजियाउलह्क, सहित नगर मे अंकों जगह पर जनता गुल्लक की कमाई से चिकन और मटन की दावतें उड़ायी हैं।

09/10/2023 को दर्ज होने वाले मामले मे गिरफ्तारी के संबंध में जनपद सहारनपुर के आला अधिकारियों की ओर से कोई पुष्टि अभी तक नहीं हुई है आधिकारिक पुष्टि होने पर हम आपको जानकारी देंगे अभी आपको बताते हैं ठग ऑफ देवबंद के सरदार के मुख्य किरदार मुकादम दर्ज होने के बाद भी सोशल मीडिया पर खूब सक्रिय हैं पूर्व मे गालियाँ देनें वाली विडियो तक अपने सोशल अकाउंट पर डाल रहे हैं।

मगर आगे ये देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या मस्जिद के असली वारिसों के नाम का पत्थर ही मस्जिद पर लग सकेगा या नहीं..?  शेष क्रमशः








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