अंतिम सांस तक अन्नदाता की लड़ाई लड़ते रहे बाबा महेंद्र सिंह टिकैत : आरिफ मलिक
- स्वर्गीय बाबा महेंद्र सिंह टिकैत का 88 वा जन्मदिवस किसान जागृति दिवस के रूप में मनाया
- यूनियन के संस्थापक स्वर्गीय बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की 88 वी जयंती पर उन्हें याद किया गया। उनके चित्र पर पुष्पार्पित किए और जीवन पर प्रकाश डाला गया।
सहारनपुर-- सड़क दूधली स्थित किसान नेता आरिफ मलिक के आवास पर बाबा महेंद्र सिंह की टिकैत की जयंती अबकी बार किसान जागृति दिवस के रूप मे मनाई गई वे सभी से उनके पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया गया।
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किसान नेता आरिफ मलिक ने कहा की चौ. महेंद्र सिंह टिकैत, एक ऐसी शख्सियत जिनका दिल हमेशा किसानों के लिए धड़कता था । करमूखेड़ी बिजली घर पर धरने ने बाबा को महानायक के रूप में प्रतिष्ठित किया। इसके बाद इस महानायक ने अपनी पूरी जिंदगी किसानों के दुख दर्द को समर्पित कर दी।
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किसान उत्पीड़न पर वे हमेशा सरकार और प्रशासन के सामने दीवार बनकर खड़े रहे। इतना ही नहीं वे किसानों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीखा गए। करमूखेड़ी बिजलीघर पर गोलीबारी में किसान अकबर और जयपाल सिंह की मौत के बाद हुई विशाल रैली में चौ. महेंद्र सिंह टिकैत की हुंकार की गूंज देशभर में सुनाई दी। टिकैत रातों रात किसानों- मजदूरों के मसीहा बन गए। इसके बावजूद टिकैत ने राजनेताओं से दूरी बनाए रखी।
किसान नेता आरिफ मलिक ने आगे अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2001 से 2010 तक जंतर-मंतर नई दिल्ली में किसानों की समस्याओं जैसे विश्व व्यापार संगठन, बीज विधेयक 2004, जैव परिवर्तित बीज, किसानों के कर्ज माफी, फैसलों का उचित लाभकारी मूल्य आदि को लेकर प्रत्येक वर्ष विशाल किसान पंचायत का सफल आयोजन किया।
अस्वस्थता के दौरान भी चौ. टिकैत ने फरवरी 2011 में ऐलान किया कि देश के प्रधानमंत्री किसानों की समस्याओं पर गंभीर नहीं हैं। अगर प्रधानमंत्री किसान प्रतिनिधिमंडल से वार्ता नहीं करते तो दिल्ली को चारों तरफ से बंद किया जाएगा। इस पर सरकार ने आठ मार्च 2011 को ही किसान प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर वार्ता की।
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अस्वस्थता के चलते चौ. टिकैत इस वार्ता में नहीं जा सके। भारत के प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने फोन कर चौ. टिकैत के स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए किसान समस्याओं को गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। किसान नेता असमान मलिक ने कहा की बाबा टिकैत के इंकलाबी इतिहास में मेरठ का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 27 जनवरी 1988 से लेकर 19 फरवरी 1988 तक किसानों की समस्याओं को लेकर कमिश्नरी पर भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के नेतृत्व डेरा डाले रखा। ठंड अधिक होने से कई किसानों की मौत भी हुई।
किसानों ने धैर्य नहीं छोड़ा और हक के लिए लड़ाई लड़ते रहे। सैकड़ों भट्टियां यहां चढ़ीं। सैकड़ों गांव से खाद्यान्न सामग्री आती थी। चौधरी अजित सिंह समेत देश भर के नेताओं ने टिकैत के आंदोलन का समर्थन किया था।
इस दौरान आरिफ मलिक, असमान मलिक, जावेद मलिक, अंकित सैनी, मुस्तकीम भूरा, नजाकत मलिक, महेन्द्र अरोड़ा, नौशाद मलिक, सोकीन मलिक, गफ्फार खान, संदीप धीमान, संजय करसानिया, प्रवीण सिंह, नवाब, राजवीर गुर्जर, फैसल मलिक, प्रमोद गोसाई, इरफान, जयदीप शर्मा, सावेज, चौधरी मित्तर शर्मा, हरपाल सिंह, महेश, नितिन शर्मा, अहमद अली, श्रीपाल सिंह, अमर सिंह, अभिषेक, रामकुमार आदि मौजूद रहे।





