क्या नगर पालिका देवबंद की आर्थिक स्थिति एक डस्टबीन लगाने की भी नहीं है...?
- कूड़े के पहाड़ को प्लॉट का कुड़ा बताने वाले बिरला सऊद चला रहे हैं 31 मार्च तक सफाई अभियान. या ढोंग का अभियान
- दारूल उलूम की जन्म भूमि मानी जाती है छत्ता मस्जिद, यहीं लगा था अनार का पैड
- गंदगी भरे नगरों में गोल्ड मेडल प्राप्त करने के लिए सेमीफाइनल मे विश्व विख्यात देवबंद नगर, या फतवों की नगरी
दैनिक बुलन्द भारत -- ब्यूरो सहारनपुर
दीन रज़ा सिद्दिकी
देवबंद-- किसी ने लिखा था...
शहरे नबी के बाद जो हमको,,,,,,, पसंद है।
नाम जिसका दारूल उलूम है जो देवबंद है।
मग़र ये शेर लिखने वाले शायर ने शायद आज का देवबंद नहीं देखा देखते तो किया लिखते मैं नहीं जानता।
देवबंद नगर मे सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है नाम बदलने वाली सरकारी मुहिम के चलते देवबंद का नाम बदल कर कुड़ा नगर रख देना चाहिए ताकि कूडे को नगर की उपलब्धियों की दृष्टि से देखा जाए और इस को बुरा नहीं जाना जाए।
बधाई हो,,देवबन्द नगर मे तय्यार हो चुका है कूड़े का पहाड़
बीते सालों मे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं मगर इस ओर ध्यान कोई भी नहीं दे रहा है कि देवबंद नगर को हम कहा से कहां ले आए नगर पालिका मे बेठे भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारों ने सांठगांठ कर सरकारी पेसे का दुरुपयोग किया और नगर को कचरे का ढेर बना दिया।
नगर के मुख्य मार्गों पर जिधर से आप निकलें कूड़े के गुलदस्ते सजे नज़र आजाएंगे नगर पालिका देवबंद का सफाई विभाग कब इस कूड़े को पर्यावरण और प्रदूषण के लिए जरूरी घोषित कर दे इस बारे मे कोई ठोस जानकारी मेरे पास तो नहीं है बिरला सऊद जरूर बता सकते हैं।
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छत्ता मस्जिद के निकट रहने वाले आरिफ, सलीम, अकबर, राशीद, वे अन्य लोगों से बात की पता चला कि इस सड़क पर ये कुड़ा आज ही नहीं बिखरा है बीते करीब 4 वर्षों से यही स्तिथि है उस से पहले बताते हैं कि हरे रंग एक कागज़ी डस्टबीन नगर पालिका ने लगाया था जो कुछ महीनों मे ही खुद कचरा बन गया था काग़ज़ के गलने और फ़ट जाने के बाद नगर पालिका अपने ही कूडे के वाहन मे डस्टबीन को उठा कर ले गई थी तब से यहां यही स्तिथि रहती है सड़क पर कुड़ा बिखरा रहता है लोग उसी कूड़े पर यात्रा करते रहते हैं।
दारूल उलूम मे पढ़ने वालों छात्रों ने इसी जगह कमरे भी किराये पर लिए हुए हैं उनसे भी बात की और जानना चाहा वो अपने यहां जाकर लोगों को देवबंद के बारे किया बताएंगे दुनिया की मशहूर शिक्षण संस्थानों मे से एक दारूल उलूम देवबंद जिस देवबंद मे स्तिथ है वो उनको केसा लगा छात्रों ने जो बताया वो सुन कर तो आप दंग ही रह जाएंगे इस लिए नहीं बताना चाहता कुछ बातें होती हैं जो बताई भी नहीं जा सकती हैं।
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वापस उसी मार्ग पर आ जाते हैं नगर का ये मुख्य मार्ग ठीक ठीक इतिहासीक छत्ता मस्जिद के पीछे या यूं कहें कि इमाम सहाब के मुसल्ले के आगे होता है कोई भी नाराज बिल्कुल ना हो कुड़ा सड़क पर ही होता है क्यूंकि मस्जिद की दीवार बनी हुई है ये मुख्य मार्ग मैन बाजार सरसटा बाजार को जोड़ता है दूसरी ओर यही मार्ग ईदगाह रोड की तरफ जाता है। इस मार्ग से अक्सर दारूल उलूम जाने वाले नगरवासी और ख़ास कर वो लोग जिनको दिवान मे लगे एटीएम से कैश लेना होता है जिन लोगों को मुस्लिम फण्ड जाना होता है वो भी इसी मार्ग से जाते हैं आगे बडजियाउलह्क जाने वाले लोग भी इसी मार्ग से जाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण रमजान मे जो लोग छत्ता मस्जिद मे रात की खास इबादत करने जाते हैं वो सब इसी कूडे से होकर गुज़रते हैं।
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