48 घंटे की बारिश में बहा पालिका की सफाई का ढोंग, आबकारी रोड और कायस्थ वाड़ा के घरों में घुसा नालों का बदबूदार पानी!
- आधी रात को उजड़ गए आशियाने! आदर्श प्रीत विहार कॉलोनी जलथल जनता जागकर निकालती रही पानी, सोती रही देवबंद नगर पालिका
- करोड़ों का सफाई बजट पास, फिर भी जनता के घरों में नाले का वास! देवबंद के इन दर्जनों परिवारों की बर्बादी का जिम्मेदार कौन?निर्दोष जनता के हुए इस नुकसान का मुआवजा क्या पालिका अध्यक्ष अपनी जेब से देंगे?
देवबंद। खोखले वादे, कागजी दावे और रील संस्कृति में डूबी देवबंद नगर पालिका परिषद की नाकामी का सबसे खौफनाक मंजर देखना हो, तो इस वक्त शहर की गलियों में आ जाइए। पिछले दो दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने देवबंद को पूरी तरह एक लाचार टापू में तब्दील कर दिया है। शहर के नाले-नालियां और जल निकासी का सिस्टम इस कदर दम तोड़ चुका है कि अब सड़कों पर बहने वाला गंदा, बदबूदार पानी लोगों के बेडरूम और किचन तक में अपनी जगह बना चुका है। इस भयंकर तबाही के बाद अब शहर के चौराहों से लेकर चाय की थड़ियों तक, नगर पालिका परिषद के उस रहस्यमयी 'जल निकासी बजट' और कागजों पर होने वाली 'नाला सफाई' को लेकर तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हर कोई पूछ रहा है कि आखिर वह पैसा कहाँ गया, जो जनता की सहूलियत के लिए आता है?
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देवबंद के आबकारी रोड, कायस्थ वाड़ा और आदर्श प्रीत विहार कॉलोनी से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, वो रूह कंपा देने वाले हैं। नालों का गंदा पानी बैक मारकर लोगों के घरों में घुस गया। जब पूरा शहर सो रहा था, तब इन कॉलोनियों के दर्जनों परिवार आधी रात को अपने बच्चों को बचाने और घरों से बाल्टियां भर-भरकर गंदा पानी बाहर फेंकने को मजबूर थे। प्रशासनिक संवेदनहीनता की मार झेलने वाले पीड़ितों की सूची बहुत लंबी है। इलाके के प्रतिष्ठित नागरिक, विनोद वर्मा, विनोद सैनी, महेंद्र गुप्ता, अजय मदान, राजेश शर्मा, प्रीतम सिंह वर्मा, अजय खुराना, राजेश सैनी, वसीम अहमद, सलीम अहमद, डॉ. अजब सिंह, श्रीकांत, नदीम अहमद, कुणाल पाल, सहित दर्जनों ऐसे परिवार हैं, जिनके घरों में घुटनों तक बदबूदार पानी भर गया। पूरी रात यह परिवार बेबसी के आंसू रोते हुए पानी निकालते रहे। घरों में रखा राशन, सोफे, बिस्तर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कीमती दस्तावेज भी इस गंदे पानी से प्रभावित हुए हैं। इन परिवारों को हुए इस भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा?
चमचमाती रील्स बनाम घुटनों तक पानी 50 करोड़ के सालाना बजट वाले देवबंद को नगर पालिका ने बनाया 'टापू
जब टैक्स वसूलने की बारी आती है, तो नगर पालिका सबसे आगे खड़ी नजर आती है। लेकिन जब दो दिन की बारिश में पूरा शहर डूब जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपनी ऐशगाहों में छिप जाते हैं। जनता अब सोशल मीडिया पर ड्रोन उड़ाकर नाला सफाई की झूठी वाहवाही लूटने वाले हुक्मरानों से सीधे सवाल पूछ रही है क्या इसी 'सफाई अभियान' का ढोल पीटा जा रहा था कि जनता को अपने ही घरों में कैदी बनना पड़े? जल निकासी और नाला सफाई के नाम पर हर साल जो करोड़ों का बजट ठिकाने लगाया जाता है, उसकी हकीकत यही जलभराव है? निर्दोष जनता के हुए इस नुकसान का मुआवजा क्या पालिका अध्यक्ष अपनी जेब से देंगे?
देवबंद की जनता का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। अगर जल्द ही इन जलमग्न कॉलोनियों से पानी की निकासी नहीं की गई और इस स्थायी समस्या का ठोस समाधान (सीवर लाइन) नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में जनता का यह आक्रोश सड़कों पर एक बड़े आंदोलन के रूप में फूटने के लिए तैयार है!

