देवबंद विद्युत विभाग का गुंडाराज 40 करोड़ की चोरी छिपाने के लिए महिलाओं से अभद्रता, TG-2 दे रहे मुकदमों की धमकियां
- देवबंद में 'करंट' वाली डकैती 50 हजार के बकाएदारों पर मेहरबान विभाग, जेई विष्णु कोठारी के खिलाफ मुख्य अभियंता से शिकायत, विजिलेंस जांच की उठी मांग
- करोड़ों डकारने वाले 'मगरमच्छों' पर मेहरबानी, और 5 हजार के बकाए के लिए बज रही घरों की कुंडीयां और घंटियाँ, देवबंद में TG-2 बने रहे थानेदार
- आईडी और मीटर नंबर के साथ जेई की 'सेटिंग' बेनकाब देवबंद में अपनी नाकामी छिपाने के लिए उपभोक्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश
देवबंद। सालाना 40 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व को निगलने वाला देवबंद का विद्युत विभाग अब पूरी तरह से 'गुंडाराज' और तानाशाही पर उतर आया है। अपनी घोर नाकामियों, भ्रष्ट अधिकारियों की कारगुजारियों और वीआईपी इलाकों में हो रही करोड़ों की डकैती पर पर्दा डालने के लिए, इस विभाग ने अब आम और शरीफ उपभोक्ताओं को प्रताड़ित करने का नया और शर्मनाक हथकंडा अपना लिया है। हालत यह है कि देवबंद नगर में जो विभाग 40-40 करोड़ का घाटा नहीं रोक पा रहा, वो अब महज 5 हज़ार रुपये के बकाए के लिए आम जनता की चौखट पर जाकर खट खट कर रहा है।
विभाग की नाकामी का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आता है जब दिन के उजाले में चेकिंग और वसूली के नाम पर विभाग की टीमें शरीफ शहरी उपभोक्ताओं के घरों पर धमकती हैं जो शहरी उपभोक्ता हर महीने 5 हज़ार रुपये तक का बिल भरते हैं, उन पर अगर किसी कारणवश 5 हज़ार का बकाया रह जाए, तो विभाग के कर्मचारी उनके दरवाजे खटखटा रहे हैं। घरों में अक्सर पुरुष काम पर होते हैं और देवबंद नगर की माताओं और बहनों को इन कर्मचारियों की बदतमीजी का सामना करना पड़ रहा है। अगर कोई महिला अपने सम्मान की खातिर या सवाल पूछने के लिए इन कर्मचारियों से कुछ कह दे, तो विभाग में बैठे TG-2 खुद को 'थानेदार' समझने लगते हैं। और उपभोक्ताओं को सीधे मुकदमे (FIR) लिखवाने और जेल भेजने की धमकियां देने पर उतारू हो जाते हैं। जनता आज यह समझना चाहती है कि विभाग में बैठे इन तथाकथित 'पढ़े-लिखे' लोगों की भाषा कैसी होनी चाहिए? उपभोक्ता आखिर इस विभाग का 'ग्राहक' है, कोई अपराधी नहीं! ग्राहकों के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए, क्या उच्च अधिकारियों ने अपने इन बेलगाम कर्मचारियों को यह बुनियादी तहजीब भी नहीं सिखाई है? इस तानाशाही पर शासन स्तर पर गंभीर चिंतन होना चाहिए विभाग का यह दोगलापन देखिए कि 5 हज़ार के लिए घरों की महिलाओं को डराया जा रहा है, जबकि रिश्वत और 'चढ़ावे' के दम पर बड़े-बड़े बकाएदारों को वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है।
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अवर अभियंता (जेई) विष्णु कोठारी के कारनामे इसका जीता-जागता सुबूत हैं सराय माल्यान में एक पुराना 1 किलोवाट का कनेक्शन (ID - 7882274000) था, जिस पर 50,000 रुपये का भारी बकाया था। लेकिन जेई विष्णु कोठारी ने उपभोक्ता को बहला-फुसलाकर उसी बकाएदार परिसर पर नया कनेक्शन (ID - 8064852694, मीटर नम्बर - AL0417907) जारी कर दिया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जेई कहते हैं कि इसके लिए "SDO और Ex.En को भी चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। वक्फ दारुल उलूम, सैय्यद कॉलोनी में 2 किलोवाट का कनेक्शन (ID - 6478080623, मीटर नम्बर - 1911629) था, जिस पर 45,806 रुपये का बकाया चल रहा था। जेई ने वो मीटर उखाड़ कर दूसरी जगह (इकराम कॉलोनी) मे लगा दिया और उसी पुराने बकाएदार परिसर पर 4 किलोवाट का नया कनेक्शन (ID - 9130130752, मीटर नम्बर - SI 1210885) दिला दिया।
इतना ही नही जेई विष्णु कोठारी पर नेचलगढ़ (गडरियान चौक) में बिना किसी विभागीय एस्टीमेट के पोल शिफ्ट करने के एवज में मोटी रकम वसूलने की लिखित शिकायत मुख्य अभियंता से की गई है। क्या 5 हज़ार के बकाया के लिए घर घर जाकर बिल जमा करने की नसीहतें देने वाले TG-2 और एसडीओ की हिम्मत है कि वो जेई विष्णु कोठारी की इन 'मलाईदार सेटिंग' वाले IDs और मीटर नंबरों की जांच कर मुकदमा दर्ज करवाएं? अगर विभाग को वास्तव में लाइन लॉस और राजस्व घाटे की चिंता है, तो वह उन फीडरों पर पीएसी बल क्यों नहीं ले जाता जहाँ असली मगरमच्छ बैठे हैं? टाउन फीडर 1 SDM कोर्ट, रेलवे रोड और पॉश कॉलोनियों वाले इस फीडर से हर साल 7.98 करोड़ रुपये का चूना लग रहा है (62.76% घाटा)। टाउन फीडर 2 गुज्जरवाड़ा, मेन बाजार, और मंगलौर बस स्टैंड वाले इस फीडर से सालाना 8.80 करोड़ रुपये की डकैती हो रही है (63.54% घाटा)। इन मुख्य व्यापारिक इलाकों में इंसुलेटेड ABC केबल पर बिना विभागीय अधिकारियों और लाइनमैनों की मिलीभगत के 17 करोड़ की चोरी तकनीकी रूप से असंभव है।
मुख्य अभियंता राजेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रविंद्र बाबू, अवर अभियंता विष्णु कोठारी और एसडीओ संतोष कुमार को अब यह साफ समझ लेना चाहिए कि देवबंद की जनता सब जान चुकी है वायरल वीडियो, फर्जीवाड़े वाले ID और मीटर नंबर, और 17 करोड़ के लाइन लॉस के सुबूत इस बात की गवाही दे रहे हैं कि 40 करोड़ के गबन का असली जिम्मेदार कौन है माताओं-बहनों का अपमान और मुकदमों की धमकियां देकर आप अपनी खाल नहीं बचा सकते। देवबंद की जनता की एक ही मांग ह "उपभोक्ताओं को डराने के बजाय, करोड़ों का गबन करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों, लाइनमैनों और दलालों की संपत्तियों की विजिलेंस जांच हो और अभद्रता करने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
इस पूरे महाघोटाले की सबसे शर्मनाक स्थिति तो यह है कि भ्रष्टाचार की पोल खुलती देख विभाग में बैठे दलाल अब पूरी तरह से बौखलाहट पर उतर आए हैं। सच को दबाने के लिए ये भ्रष्ट अधिकारी अपने 'कबूतरों' के जरिए हमें चिट्ठियां भेजकर खबरें न लिखने की हिदायत दे रहे हैं। ये सफेदपोश दलाल हमारे घर और दुकान का पता होने की बात कहकर खौफ पैदा करने की बचकानी कोशिश कर रहे हैं। तो कान खोलकर सुन लीजिए आपको रोका किसने है? शौक से आइए! हमें 'मेहमाननवाजी' और 'भव्य स्वागत' करना बहुत अच्छी तरह आता है। और धमकियां देने वाले इन भ्रष्टाचारियों के लिए आखिर में मरहूम राहत इंदौरी साहब की ये दो लाइनें ही सीधा जवाब हैं
"नसीहतें ना करो इश्क करने वालों को,
ये आग और भड़क जाएगी बुझाने से।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

