देवबंद में नशे के सौदागरों पर पुलिस का प्रहार 3 तस्कर गिरफ्तार, भारी मात्रा में स्मैक और हथियार बरामद
- अंधकार से उजाले की ओर देवबंद: नशे के खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई तो बस 'ट्रेलर' है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है!
- क्या सुधरेंगे देवबंद के हालात? नशा माफियाओं पर कसता शिकंजा और एक मुकम्मल बदलाव की शुरुआत
देवबंद। सहारनपुर पुलिस द्वारा अपराधियों और नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान "नशे के अंधकार से जीवन के उजाले की ओर" के तहत देवबंद पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले 3 शातिर नशा तस्करों को धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों के पास से अवैध नशीले पदार्थ और हथियार बरामद किए गए हैं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।
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थाना देवबंद पुलिस की टीम ने चेकिंग के दौरान इन तीनों शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इनके कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद किया गया है 50 ग्राम अवैध स्मैक 01 देशी तमंचा, 01 जिन्दा कारतूस, तथा 01 खोखा कारतूस (315 बोर) 02 अवैध छुरियां तस्करी और आपस में संपर्क के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 03 मोबाइल फोन पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को हिरासत में लेकर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों का भी पर्दाफाश किया जा सके।
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देवबंद पुलिस की इस मुस्तैदी और कार्रवाई की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेलने वाले इन सौदागरों को जेल की सलाखों के पीछे भेजना एक सराहनीय कदम है। लेकिन स्थानीय नागरिकों और जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक 'शुरुआत' होनी चाहिए, न कि कोई पूर्णविराम। देवबंद और उसके आसपास के क्षेत्रों में नशे का कारोबार अंदर ही अंदर अपनी जड़ें मजबूत कर चुका है। चंद तस्करों की गिरफ्तारी से इस पूरे सिंडिकेट को खत्म नहीं किया जा सकता। यदि वाकई में देवबंद के हालात सुधारने हैं, युवाओं का भविष्य बचाना है और अपराध दर में कमी लानी है, तो पुलिस को अपनी इस 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति को लगातार जारी रखना होगा।
जब तक ऐसे छोटे-बड़े नेटवर्क पर रोज़ाना प्रहार नहीं होगा और नशा माफियाओं की कमर पूरी तरह नहीं तोड़ी जाएगी, तब तक देवबंद को पूरी तरह नशामुक्त नहीं बनाया जा सकता। जनता को उम्मीद है कि सहारनपुर पुलिस की यह मुहिम थमेगी नहीं और आने वाले दिनों में और भी बड़े मगरमच्छों पर कानून का शिकंजा कसेगा।
रिपोर्ट - दीन रज़ा

