शटडाउन' के नाम पर जनता को ठगा, अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए हिटलरशाही पर उतरा बिजली विभाग
- बिल जमा न करने पर कनेक्शन काटने की धमकियां, लेकिन घंटों की कटौती और फाल्ट पर विभाग क्यों खामोश?
- पहले बिजली दो, फिर वसूली करो! देवबंद में बिजली संकट के बीच विभाग के अभियान पर उठे बड़े सवाल
- महा-अभियान' या जनता का उत्पीड़न? वसूली के नाम पर तानाशाही, बुनियादी कमियों पर पर्दा डालने की कोशिश! यह 'काल्पनिक डर क्यूं पैदा किया जा रहा है।
देवबंद। देवबंद बिजली विभाग द्वारा राजस्व वसूली को लेकर अपनाए जा रहे सख्त रुख और कनेक्शन काटने की धमकियों के बीच अब शहर की जनता ने भी विभाग से कई तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि विभाग उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है, तो बिजली व्यवस्था में लगातार सामने आ रही खामियों के लिए जिम्मेदारी तय करने में वही सख्ती क्यों दिखाई नहीं देती? हाल ही में विभागीय अधिकारियों द्वारा वसूली अभियान को लेकर की गई समीक्षा बैठक और बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई के निर्देशों के बाद शहर में नई बहस छिड़ गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिजली बिल जमा करना उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी है, लेकिन निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना विभाग की भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।
पिछले कुछ महीनों में देवबंद के विभिन्न क्षेत्रों से केबल फाल्ट, अघोषित कटौती, ट्रांसफार्मर खराब होने और जर्जर लाइनों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में आम उपभोक्ताओं के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। यदि गर्मी से पहले मेंटेनेंस कार्य कराया गया था, तो बार-बार फाल्ट क्यों हो रहे हैं? कई क्षेत्रों में घंटों बिजली बाधित रहने की स्थिति क्यों बन रही है? जर्जर लाइनों और उपकरणों को बदलने का कार्य कब पूरा होगा? क्या बिजली आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा भी उतनी ही गंभीरता से की जा रही है, जितनी राजस्व वसूली की? स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि विभाग द्वारा चलाए जा रहे वसूली अभियान के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी ठोस कार्ययोजना सामने आनी चाहिए।
जब उपभोक्ता समय पर बिल जमा कर रहे हैं, तो उन्हें बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति भी मिलनी चाहिए। कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद फाल्ट निस्तारण में कई बार अनावश्यक देरी होती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। देवबंद के नागरिकों का कहना है कि विभाग केवल कार्रवाई और चेतावनी की भाषा न बोले, बल्कि अपनी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार करे। जनता की प्रमुख मांगें। जर्जर लाइनों और उपकरणों का तत्काल सर्वे कराया जाए। फाल्ट और ट्रांसफार्मर संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए। उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
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बिजली आज विलासिता नहीं, बल्कि आम आदमी की बुनियादी आवश्यकता है। विभाग को यह समझना होगा कि राजस्व वसूली और उपभोक्ता सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं। यदि विभाग जनता से समय पर बिल भुगतान की अपेक्षा करता है, तो जनता भी विभाग से जवाबदेही, पारदर्शिता और बेहतर बिजली व्यवस्था की उम्मीद रखने का पूरा अधिकार रखती है।
अधीक्षण अभियंता (SE) रवींद्र बाबू और उपखंड अधिकारी (SDO) संतोष कुमार यह नोट कर लें कि देवबंद की जनता जागरूक है। मई से लेकर आज तक आपके विभाग ने जो लापरवाही की है, उसके लिए आप की जवाबदेही होना चाहिए। विभागीय अधिकारी अच्छी तरह जानते हैं कि इस लोकतांत्रिक देश में जनता के पास उनके खिलाफ दफ्तर के बाहर दरी बिछाकर धरना देने और उनका घेराव करने का पूरा अधिकार है। जनता सड़कों पर न उतरे और अपनी बदहाली पर सवाल न पूछे, इसीलिए यह 'काल्पनिक डर' पैदा किया जा रहा है ताकि उपभोक्ता डिफेन्सिव मोड में आ जाए और अपनी बुनियादी मांगें (निर्बाध बिजली और सही बिल) भूल जाए। यह सीधे तौर पर तानाशाही है!
रिपोर्ट - दीन रज़ा
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