40 करोड़ के गबन का ठीकरा जनता पर, अपने भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए देवबंद की आवाम को 'चोर' साबित करने पर तुला बिजली विभाग

40 करोड़ के गबन का ठीकरा जनता पर, अपने भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए देवबंद की आवाम को 'चोर' साबित करने पर तुला बिजली विभाग

  • फीडर नंबर 2 बना भ्रष्टाचार का नया ब्लैक होल 8 करोड़ 80 लाख की डकैती, फीडर नंबर 1 और 2 में 17 करोड़ स्वाहा
  • रेलवे रोड पर धमाका, लहसवाड़ा अंधेरे में देवबंद विद्युत विभाग की जर्जर व्यवस्था बेनकाब, सिफ़ारिश पर बदले जा रहे उपकरण, लगातार ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाओं से विभागीय कार्यप्रणाली सवालों के घेरे मे 

देवबंद। देवबंद का विद्युत विभाग इन दिनों एक खौफनाक और सोची-समझी साजिश पर काम कर रहा है। सालाना 40 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व को डकारने वाले अपने भ्रष्ट अधिकारियों, लाइनमैनों, संविदा कर्मचारियों और विभाग के साये में पल रहे दलालों को बचाने के लिए, यह पूरा महकमा अब देवबंद की आम जनता को ही 'चोर' साबित करने पर तुल गया है पीएसी बल के साथ गरीब बस्तियों में चलाया जा रहा चेकिंग का अभियान' महज एक दिखावा नहीं है। इसके पीछे का असली मकसद इस 40 करोड़ के गबन का पूरा ठीकरा आम जनता के सिर फोड़ना है ताकि शासन की आँखों में धूल झोंकी जा सके और खुद को बचाया जा सके।

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जब ऊपर (लखनऊ) से लाइन लॉस और राजस्व घाटे पर फटकार पड़ती है, तो देवबंद में बैठे अधिकारी असली मगरमच्छों (रसूखदारों और कारखानेदारों) पर कार्रवाई करने के बजाय, मलिन बस्तियों और आम उपभोक्ताओं के घरों पर पीएसी लेकर चढ़ दौड़ते हैं विभाग यह साबित करने पर तुला है कि देवबंद का आम नागरिक बिजली चुरा रहा है। ये कहानी इस लिए गढ़ रहे हैं ताकि 40 करोड़ की डकैती को 'जनता की चोरी' बताकर फाइलें बंद कर दी जाएं और भ्रष्ट अधिकारियों की बेहिसाब संपत्तियों की जांच की आंच उन तक कभी न पहुंचे। एक भी 'कटिया' का सुबूत नहीं मिलने के बावजूद, आम जनता को डरा-धमका कर यह विभाग सिर्फ अपनी खाल बचाने की जद्दोजहद में लगा है।

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एक ओर विभाग जनता को चोर साबित करने और वसूली में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर देवबंद की जर्जर बिजली व्यवस्था सरेआम इनकी पोल खोल रही है। सुरक्षित और निर्बाध बिजली आपूर्ति का मूल दायित्व पूरी तरह फेल हो चुका है हाल ही में रेलवे रोड स्थित ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई और एक तेज धमाका हुआ। ट्रांसफार्मर से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं और उबलता हुआ तेल सड़क पर फैल गया। गनीमत रही कि आग पर काबू पा लिया गया, वरना बड़ा हादसा तय था।वहीँ मोहल्ला लहसवाड़ा स्थित मदीना कॉलोनी में ट्रांसफार्मर फुंक गया और लोग बिजली-पानी को तरस गए। जनता की सीधी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई। जब एक सभासद प्रत्याशी ने विभागीय अधिकारियों से वार्ता की, तब जाकर नया ट्रांसफार्मर लगाया गया। क्या आम करदाता की अब इस विभाग में कोई अहमियत नहीं बची है?

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अगर जनता बिजली चोरी कर रही है, तो विभाग उन वीआईपी और मुख्य व्यापारिक इलाकों का सच क्यों छिपा रहा है जहाँ से हर साल करोड़ों रुपये हवा में गायब हो रहे हैं? फीडर नंबर 1 (VIP इलाका): SDM कोर्ट, रेलवे रोड, पंजाबी कॉलोनी जैसे रसूखदार इलाकों वाले इस फीडर से हर साल 7 करोड़ 98 लाख रुपये का चूना लग रहा है। यहाँ 62.76 प्रतिशत का घाटा दर्ज है। और फीडर नंबर 2 तो इस से भी एक कदम आगे हैं, गुज्जरवाड़ा, मेन बाजार, मीना बाजार, लहसवाड़ा, मंगलौर बस स्टैंड, जैसे प्रमुख क्षेत्रों वाले फीडर नंबर 2 से सालाना 8 करोड़ 80 लाख रुपये की डकैती हो रही है। यहाँ का लाइन लॉस 60.39% और AT&C लॉस 63.54 प्रतिशत है।

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सवाल यह है इन मुख्य व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों में, जहाँ ABC केबल डले हैं, वहाँ बिना विभागीय मिलीभगत और 'मलाईदार सेटिंग' के 17 करोड़ की दोनों फीडर मिलाकर की बिजली कौन डकार रहा है? देवबंद की जनता अब विभाग की इस चाल को समझ चुकी है। विभाग का मौजूदा अभियान बिजली चोरी रोकने के लिए नहीं, बल्कि 40 करोड़ के गबन का ठीकरा जनता के सिर फोड़कर उन अधिकारियों, लाइनमैनों और चमचों को बचाने के लिए है, जिनकी संपत्तियों की अगर निष्पक्ष जांच हो जाए, तो कई 'सफेदपोश' सलाखों के पीछे नजर आएंगे।

रिपोर्ट - दीन रज़ा 





Deen Raza

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