जनता का इन्द्रा पार्क या रसूखदारों की पार्किंग? देवबंद में सार्वजनिक पार्क की बदहाल स्थिति पर उठने लगे सवाल
- बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने की जगह पर वाहनों का कब्जा, स्थानीय लोगों में नाराजगी
- जनता का सवाल क्या देवबंद के पार्क अब सैर-सपाटे के लिए नहीं, बल्कि पार्किंग के लिए रह गए हैं?
देवबंद। नगर के ऐतिहासिक खानकाह क्षेत्र स्थित इन्द्रा पार्क इन दिनों स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी सुबह-शाम टहलने वालों, बच्चों की खेलकूद गतिविधियों और बुजुर्गों के विश्राम का केंद्र रहा यह पार्क अब अपने मूल स्वरूप से दूर होता दिखाई दे रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पार्क का उपयोग धीरे-धीरे सार्वजनिक हरित क्षेत्र की बजाय पार्किंग स्थल और विभिन्न विभागों के उपयोग क्षेत्र के रूप में होने लगा है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिस स्थान को नागरिकों की सुविधा और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से विकसित किया गया था, वहां अब निजी वाहनों और कुछ सरकारी वाहनों की मौजूदगी आम बात हो गई है। लोगों का आरोप है कि पार्क के भीतर खड़े वाहन न केवल पार्क की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि हरित क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पार्क परिसर में कई बार निजी वाहनों के साथ-साथ नगर पालिका से संबंधित वाहन भी खड़े दिखाई देते हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि सार्वजनिक पार्कों का यही हाल रहा तो आने वाले समय में बच्चों और बुजुर्गों के लिए खुले स्थान पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। क्षेत्र के एक बुजुर्ग निवासी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस पार्क में कभी सुबह-शाम लोगों की भीड़ रहती थी, वहां अब गाड़ियों की कतारें दिखाई देती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्कों का उपयोग भी पार्किंग के रूप में होने लगेगा तो नागरिक आखिर जाएं कहां? स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों के दौरान पार्क का स्वरूप लगातार बदलता गया। नागरिकों का कहना है कि विभिन्न सार्वजनिक निर्माण कार्यों और विभागीय उपयोग के चलते पार्क का क्षेत्रफल धीरे-धीरे कम होता गया।
लोगों का दावा है कि पार्क के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर विभिन्न निर्माण कार्य हुए, जिससे सार्वजनिक उपयोग का क्षेत्र प्रभावित हुआ। हालांकि इन निर्माणों की वैधता और आवश्यकता पर अंतिम निर्णय संबंधित विभाग ही स्पष्ट कर सकते हैं, लेकिन आम नागरिकों में इसे लेकर असंतोष साफ दिखाई देता है। नगर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि हरित क्षेत्र किसी भी शहर के फेफड़े होते हैं। यदि पार्कों को धीरे-धीरे अन्य उपयोगों में बदल दिया जाएगा तो पर्यावरणीय संतुलन और नागरिक सुविधाओं दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लोगों का कहना है कि पार्कों का संरक्षण केवल नगर पालिका या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। ऐसे में यदि सार्वजनिक स्थलों का उपयोग उनके मूल उद्देश्य से अलग हो रहा है तो इसकी समीक्षा होना आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इन्द्रा पार्क की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण कराया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पार्क का उपयोग केवल सार्वजनिक हित और नागरिक सुविधाओं के लिए ही हो। लोगों का कहना है कि यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए इन्द्रा पार्क को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की निगाहें प्रशासन और नगर पालिका परिषद पर टिकी हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते पार्क को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां खुले मैदान, हरियाली और सार्वजनिक पार्कों को केवल तस्वीरों में ही देख पाएंगी।
देवबंद के नागरिक अब यह जानना चाहते हैं कि इन्द्रा पार्क आखिर जनता के लिए रहेगा या धीरे-धीरे पार्किंग और विभागीय उपयोग का स्थायी केंद्र बन जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
रिपोर्ट - दीन रज़ा



